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शिवक  घरतलाशी 

के तोहर हर करतौ मान ??
सदिखन नग्न मसनहि डेरा, संग अपंग अंध कन्डेरा !
चिता भसम हित मचबह रेड़ा, तीन नयन अशुभक प्रमाण !!
के तोहर हर करतौ मान ??

ठकि  अनलह राजा केर बेटी, गुजर कोना चलतह बिन खेती !
की गिरिजा तोरा घर खएती, तदपि ब्याह लए छला हरान !!
के तोहर हर करतौ मान ??

आब न' भांग धथुरक आशा,उनटि गेलै पहिलुका पाशा !
ख़एबह पुलिस पहुचतौ बासा, घरक तलाशी सन अपमान !!
के तोहर हर करतौ मान ??

माला बनबक हित नर हत्या, लगतौ चारु चरण अगत्या !
भने एहन के पिचल लतिया, क्रुद्धा काली बरु अंजान !!
के तोहर हर करतौ मान ??

कतहु नै देखलौं एहन पियकर,विष पीबक हित पोसह विषधर !
पाँचो मुंह बेमेल भयंकर, अगणित दोष सरूप निदान!!
के तोहर हर करतौ मान ??

सब देवता ठकलक तोरा, नीक विभाग राखि निज झोड़ा !
तों धयलह संहारक डोरा, ओ सब जन्म मरण अभियान 
के तोहर हर करतौ मान ??

अर्द्धचंद्र मतलब गरगोंटिया, से छौ तोरा दुरमतिया !
छह जनजाति परबतिया, तैयो नै भेलो उत्थान?!!
के तोहर हर करतौ मान ??

यद्धपि हम बाजल छी सते, तदपि ह्रदय में भय अछि तते !
तोँ साबर -बाबर अछि जते, सब डाइनिक छह गुरु महान !!
तैं डर सँ हर करबौ मान !!

लेखक:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
साभार:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
प्रस्तुति:- राजीव मिश्र(अपन मिथला धाम)
सुचना:- कृपया क कें अही कविता क कोप्पी न करी और एकरा इत्र-वित्र जगह पर पोस्ट नै करी.
Tag: maithli comedy, maithli chutkala, jay prakash choudhary maithli poetry, janak jee ke kavita, janak jee ke chutkal, maithli comedy of janak jee: Korthu, Ghanhan satyug aab, jay prakash choudhari”janak” jee, Maithili songs of janak jee, Maithili songs written by janak jee




घनहन सतयुग आब

बीत गेले कलयुग कहिया ने, घंहन सतयुग आब !
मिसियो भरि ककरो पर छजतनि, ककरो आई रुआब !!

कहियो देखने छला लाख टका कमरथुआ बैधनाथ ?
भारक भार गंगाजल पी-पी गौरिक संग सनाथ !!

कोनो मंठ पर कहियो कतौ रामायानक नवाह ?
मंदिर-मंदिर स्पीकर पर आठो काण्ड प्रबाह !!

ब्याह्दान में राज-रजबाड़ा में जे डेकोरेशन !
तते एखुनका कियो करैए के देलकैक सजेसन ?

बिन मंगने फटफटिया गाड़ी बुडिबकहोक बिदाई !
एक्को बेर बिना कारक नै औति बुच्ची दाइ !!

कोदो,मरुआ, अल्हुआ, सुथनी, ककरो छैक अहार?
बिषठी,गाँती,कौपीनक, क्यों रखने अछि बेवहार?

राति बिराती, सेन्ध दए घरमे, कतौ होइए चोरि?
दिन दृष्टी जे होइछै से तं ढाहि तिजोरी तोड़ी !!

ढेंगरियैल घर-घर में साझर, आब न औंठा छाप !
हनुमत जकाँ आइ अमरीका, हमरा दुइये धाप !!

तनले रहनि तीर अर्जुनक, से परमाणुक बम्म !
धरती सँ उड़ी कें मानव मंगल पर मारए दम्म !!

घर-घर में बिजलीक पंखा, खेत-खेत में पानि !
दुआरी-दुआरी पर चान तरेगन, टीम-टीम कर दिन रैन !!

स्नातक बनि गुरुआश्रम सँ अबै छला दु एक !
गणना एखन विदुवानक छुटत भवन गोटेक !!

लेखक:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
साभार:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
प्रस्तुति:- राजीव मिश्र(अपन मिथला धाम)
सुचना:- कृपया क कें अही कविता क कोप्पी न करी और एकरा इत्र-वित्र जगह पर पोस्ट नै करी.
Tag: maithli comedy, maithli chutkala, jay prakash choudhary maithli poetry, janak jee ke kavita, janak jee ke chutkal, maithli comedy of janak jee: Korthu, Ghanhan satyug aab, jay prakash choudhari”janak” jee, Maithili songs of janak jee, Maithili songs written by janak jee

ठकदरुआ

बड़की भौजी कहलनि बच्चा, क ने लिय वियाह !
पर्वत सन जिनगी बांकी अछि
, हैत अबूह अथाह !!

तखन कहलियनि ऐ भौजी
, हम सब छि सोझ किसान !
मोट पसम सब दिन रह्बैया
, बएसो भेल पुरान !!

आबक नवकी लोक मंगे छै
, लाल लिपिस्टिक सेन्ट !
हमरा कहत टिक कटबह आ पहिरह लुंगी पेन्ट !!


बाप जन्म जौं बड़ देखलों त मंचुभ्भी रमलीला !

अबिते कहत चलू ने सिनेमा बनियों छैल छबीला !!


संत बबाजी कोना रहै छै
, तहिना रहब बेजोड़ !
माल जाल आ जाल माल पर
, परिकत रतुका चोर !!

कैल कहत टीवी कीन दे
, पीबौ भोर चाह !
जेहो दू विघा दंतियेने छि
, बेचू तखन निवाह !!

बियाह करए के
? पढल- लिखल आ पैसा बला जुआन !
मंगे एक गज
, आनि दैक जे छ्पुआ थानक थान !!

बेटी गरा केर घेघ भेल छै
, चाहब, हैत बियाह !
मुदा आब हम काल कटई छि
, डारों भेल अबाह !!

ओकरा संगे फोटो घिचबू
, चोटकल हमर थूथुन !
दांत एखन नौ टूटल रहिते
, खेलक तमाकू चुन !!

भौज थिकौं जौं दया लगैए
, नीप दिय घर दुआरी !
बेर बेगरता जोग दिय
, ई सुनिते पढ़लनी गारि!!
                  आँहा केर हम ठकदरुआ? कहलियनि भौजी फगुआ !!

लेखक:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
साभार:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
प्रस्तुति:- राजीव मिश्र(अपन मिथला धाम)
सुचना:- कृपया क कें अही कविता क कोप्पी न करी और एकरा इत्र-वित्र जगह पर पोस्ट नै करी.
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पहिले फगुआ झुर- झमान
सबहक फागुन, हमर बितैये सौने मास जनता भगवान !
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!

मोनक बात मने में रहलै, ककरा पर करबै सिंगार !
ढ़ोआ में परिकल मरदाबा, की बुझ्तैक दुलार मलार ?
जेठ मासमें गाम अबैया, रखिहs विस्तर जतय बथान !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!

तेहन मीठ सपना सपनेलियै, सौंसे देह पसेना घाम !
निन्न टूटल की लैह बलैया, ने ओ नगरी ने ओ ठाम !!
अप्पन मुक्का अपने छाती, जाह जुआनी भेलह जियान !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!

नै पकैब पुआ मलपुआ, हमरा लागए हर-हर तीत !
बारह मासक बाद एहन दिन, की जानी के मरते के जीते?
लाख कहै छि चर्च नै करबै, तैयो चंडलबे पर ध्यान !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!   

केहेन-केहेन सरभिस बला सब ऐल आठ दिन पहिने गाम !
ई सुधमुँहा डटल फैक्टरी, ओकर नै हमर दिन बाम !!
फोनक नम्मर जँ रहितेs, मालिक कें दितिये से डपटान !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!

बड़ दुष्टाही सासु निसोखिया, हरदम बाजै भने न ऐल !
बिना कमेने कोना निमेरा, हमहूँ भार छियै लगिचैल !!
सुनीते हमरा तीर लगैये, ई बुढिया नमरी शैतान !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!   

लक्पक-लक्पक दुनु दियर, भौजी संगे रंग बहार !
 मोछ पिजैले रहतनि सबहक, भोरे ठोकबै बजर केबाड़ !!
ता धरि रहब बंद कोठली, जा डूबत गोसैयाँ पड़त अजान !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!  

एक बाप केर जँ हम बेटी, हेइये घिचलौं तीन लकीर !
गाम एतै नै टोकबै बजबै, अनमन बनबै बौक बहीर !!
"जनक" जनानी अहिना हनछिंन, देखिते देरी कछ्मछ प्राण !!
ओ नीरस निरदैया मनसा, पहिले फगुआ झुर- झमान !!
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उलहन 
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!
तजलक पूजा सब विद्यालय, नाम न लैछ महाविद्यालय !
मत मातल घमशान उपद्रव, जहिया मूर्ति भसान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

बाट बन्न अछि तोरे नामे, माघ बैरियर गामे-गामे !
समय गमायब, कथो सुनए मुक्का थापड़ कोचवान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

किए करत कियो तोहर अरधान, के पबैत अछि बड़का अन-धन !
तोहर देल कागत सबूत ल' ढहनाइछ  बबुआन !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

टॉप योग्यता पौने बौआ, तैयो चाही कसगर ढोआ!
से लक्ष्मीक कृपे सँ भेटए , तैं हुनक गुणगान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

बरदे सौंसे देशक देवा, जरसिक सेवा सध: मेवा !
जते पढुआ तते लफुआ, धनि किसान भगवान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

रटलनि वेद हमर परबाबा, फंकलनि छुच्छे धानक लाबा !
वैह कर्म हम फेर करू, बरु फोलब पान दोकान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

दूइर भेल इ हाथक वीणा, एकरा बजबए नगन हसीना !
टेप सिनेमा टेलीविजनो, गिरलक गान बजान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

विद्या पढने बेरोजगारी, करै तिरस्कृत अपने नारी !
बिना नोन रोटिक नियोजन, सरकारी अनुदान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

सौतिन तोहर परम लक्ष्मीनियाँ, तोरा सेवकक ओ दुश्मनियाँ !
अन्न बिना ओ मारि सकै, से ओकरा लेल असान!!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!

कनडेरियो जौं कने तकै छह, छाहरी तरक पाइ धरि दै छह !
ठिकेदार सन गुम्बज नहि हो, सगर देश सम्मान !!
हे सरस्वती तोरो चलती, दिन-दिन हैत मलान !!  

लेखक:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
साभार:- जय प्रकाश चौधरी"जनक"
प्रस्तुति:- राजीव मिश्र(अपन मिथला धाम)
सुचना:- कृपया क कें अही कविता क कोप्पी न करी और एकरा इत्र-वित्र जगह पर पोस्ट नै करी.
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