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KOKIL MANCH 
मैथिलीक उत्कृष्ट नाट्य संस्था कोकिल मंच केर 23म वार्षिकोत्सवक अवसर पर मंच द्वारा महानगर स्थित महाजाति सदनमे 3 फ़रवरी 2013 कें सायं 4:30 बजे समस्यामूलक नाटक 'पातक मनुक्ख' केर सफ़ल मंचन भेल. पं. गोबिन्द झा द्वारा लिखल कथाकें नाट्यरूप देने छथि प्रसिद्ध नाट्यकार अरविन्द अक्कू. समाजक ज्वलंत समस्या पर केन्द्रित एहि नाटक केर उद्दॆश्य सामाजिक सुधारोन्मुखी तथा जन चेतना कें जगाबय बला अछि. 'पातक मनुक्ख' एक तरहें मिथिला समाजमे व्याप्त धन-लोलुप दबंग आ साधारण मनुक्खक विषम परिस्थितिसं अनुचित लाभ उठाबय बला तथाकथित समाजक दलाल केर कुप्रवृति पर साहित्यिक, सामाजिक प्रहार आ कटाक्ष अछि. हमर समाजमे एहि कुप्रवृतिसं ग्रसित लोक एखनो धरि समाजगत ढांचा कें विध्वंश करय पर लागल अछि. मानवीय व सामाजिक मूल्यक हनन, संवेदनशून्य लोक कें सजीव चित्रण कयल गेल अछि एहि नाटकमे. 

मंचित नाटककें केन्द्र बिन्दुमे एक एहन अबलाक मार्मिक कहानी अछि जिनक पति ग्रामीण दबंगक चालि चलनसं प्रताड़ित भ’ भागि जाइछ. हुनक दियाद भाय एवं तथाकथित शुभचिन्तक गामक दबंग लोक कें संगे गरीबीक मारल अबला लालगंज बाली काकी केर जीवित पति बतहू कें 'पातक मनुक्ख' बनाक' श्राद्ध-कर्मक नाम पर सब जमीन अपना नाम करबाक कुचक्र रचैत अछि. मुदा हरेक समाज मे नीक लोक होयत अछि. नीक लोकक प्रतिनिधिक रूप मे समाज सेवक प्रकाश आ समाज सेविका बहिन दाइ किछु सहॄदय ग्रामीणक सहयोगसं ओहि अबला कें पतित लोकसं रक्षा करैत अछि. भरल समाजक सोझामे गामक जमीन्दार फ़ूदन ठाकुर श्राधक कार्यक्रम करबाक लेल बतहू कें 'पातक मनुक्ख' बनेबाक आदेश देइत अछि त' दोसर दिस जमीन अपन नाम करबाक लेल संतोषी मिसिर कें स्टाम्प पेपर थमा देइत अछि लाल काकी केर अंगूठाक निशानी लेल. जोर जबरदस्ती सं लालगंज काकीक अंगूठाक नेशान लयबाक कुचेष्टा होइत अछि. मुदा समय पर प्रकाश, बहिन दाइ आ किछु नीक ग्रामीणक सहयोग सं एहि कुचाइलक भंडाफ़ॊड़ भ’ जाइत अछि.

अभिनयक दृष्टिसं गंभीरतापूर्वक विश्लेषण कयला पर लालगंज बाली काकीक भूमिका मे किरण झाक अभिनय जीबंत छल. किरणजी जाहि तरहे जीवनक मार्मिकतासं अपन भूमिकाक निर्वहन कयलनि ओ बड्ड प्रशंसित भेल. प्रारंभ सं अन्त धरि हुनक आंखिमे नोरक प्रवाह दर्शकक आंखिमे देखल जा सकैत छल. हुनक संवाद अदायगी अभिनीत चरित्र कें जीवंत बनेने छल.
तथाकथित धनाढय व्यक्ति केर लगुआ-भगुआ संतोषी मिसिरक भूमिका मे संजय ठाकुर केर अभिनय सराहनीय छल. बाजय केर ढंग, मंच पर हुनक चलबाक ढंग, आंखिक संचालन वाच्य-अंतरण आदि संतोषी मिसिरक चरित्र कें सजीब बना देने छल. करगर आवाज आ मोंछ पर ताव देबय बला अंदाज एहन जे दर्शक कें मोनमे हुनका प्रति घृणा उत्पन्न कय देने अछि, एहन बुझना गेल.
समाज सेवक आ सुधारक प्रकाश केर भूमिका रंजीत कुमार झा पूर्णतया उपयुक्त लागल. रंजीत जी अपन भूमिका सं नीक जकां निमाहलनि. हुनक अभिनयक अहम पक्ष छल हुनक संवाद. एक-एक संवाद मे किछु ने किछु सकारात्मक संदेश छल. एहि नाटकमे अपन अभिनयक द्वारा नाटकक मुख्य संदेश दर्शकक माध्यमें समाज धरि पहुचाबयमे सफ़ल भेलाह. कोलकाता स्थित रंगमंच पर नवतुरिया रंगकर्मी सबमे रंजीतजी एकटा उत्साही, सफ़ल, प्रभावी रंगकर्मीक रूपमे उभरि क' अयलाह अछि. हुनक सहकर्मी आ समाजसेविकाक भूमिका मे गीता चौधरी सेहो बड्ड नीक अभिनय कयलनि अछि. मुदा किछु बेसी बयस होमय केर कारण हुनक अभिनयमे एकटा सशक्त समाज सेविकाक किरदार परिलक्षित होमयमे किछु खटकल.




रंगकर्मी सुधाचन्द्र झा गामक धनलोलुप व्यक्ति फ़ूदन ठाकुरक भूमिकामे छलाह. नाटकक खल पात्रक भूमिका संग इमानदारी बरतलाह. हुनक अभिनय प्रशंसनीय छल. पंडित जीक भूमिकामें आनन्द किशोर ठाकुर छलथि जे चलय व बैसय केर क्रममे दू तीन बेर मंच पर खसि पड़लाह आ एहि तरहे बीच-बीचमे दर्शक कें खूब हसबैत रहलाह. ग्रामीणक भूमिकामे राजीव मिश्र, प्रकाश मिश्र, देबेन्द्र झा आदि केर नीक काज रहल. ऑफ़ स्टेज सहयोगमे शीतल झाक अहम योगदान छलनि. कुल मिला क' नाटकक सब पात्रक अभिनय दर्शक कें भरि नाटक बान्हिकए राखयमे सफ़ल भेल.
अनुभवी नाट्य निर्देशक गंगा झाक संचालन आ निर्देशनक बड्ड विशिष्ट छल. मानसिक द्वंद्व कें प्रदर्शित करबाक लेल किछु नीक प्रयोग केने छलथि. परिणामस्वरूप नाटक बेसी स बेसी प्रभावी बनैत चलि गेल. मंच पर किछु एहनो प्रयोग छल जकरा देखला सं सिनेमामे प्रयुक्त तकनीकक इयाद दियौलक. गंगा बाबूक सफ़ल निर्देशनमे संपन्न आ मंचित भेल ई सफ़ल नाटक अपन उद्देश्य में सेहो सफ़ल भेल, एहन बुझना जा सकैछ.



नाट्य मंचन सं पूर्व आयोजित उदघाटन कार्यक्रममे मंचस्थ पाहुन व शिक्षाविद भोगेन्द्र झा आ कोकिल मंचक अध्यक्ष जीबेन्द्र मिश्र केर नीक उदगार सुनबाक भेटल. अतिथि लोकनिक द्वारा विद्यापति पर माल्यार्पणक पश्चात मंचक सचिव नबोनारायण मिश्र समस्त मैथिल दर्शककें अभिनंदन करैत कहलाह जे मंच जे कहैत अछि से एकर कार्यमे परिलक्षित होइत अछि. पूर्वमे मंचक अध्यक्ष जीबेन्द्र मिश्रक ओहि आश्वासन पर फ़ेर चर्चा करैत कहलाह जे आश्वासन केर अनुसार 25 वर्ष केर उपलक्ष्यमे एक सप्ताह्व्यापी नाट्यप्रस्तुति होयत. आ ओ ऒहि दिनक प्रतीक्षा कय रहल छथि.
एहि कार्यक्रमक मुख्य अतिथि आ प्रख्यात मैथिल शिक्षाविद आ समाजसेवी भोगेन्द्र झा अपना आप कें समस्त मैथिल-मैथिली गतिविधिसं जोड़ैत कहलनि जे ओ कोकिल मंचक सदस्य छथि. मंचक पूर्व गतिविधि पर प्रकाश रखैत कहलाह जे 23 वर्ष एकटा पैघ समय होइछ. कोकिल मंच कें अपन उद्देशय मे आगू बढबा पर धन्यवाद देइत कहलाह जे मंचक 25 वर्ख भेला पर एकटा महोत्सवक आयोजन होयत. संगहि मनक क्षोभ व्यक्त करैत कहलनि जे सांस्कृतिक राजधानी कोलकातामे बहुत रास संस्था अछि. मुदा ई सब संस्था टूकड़ा-टुकड़ा मे बटल अछि जेकि मिथिलाक लेल शुभ नहि. आपसी मतभेदक अखाड़ा बनि रहल अछि ई सब संस्था. मिथिला समाज मे “टंगखिचुआ” अपसंस्कृति केर भर्त्सना करैत कहलाह जे मिथिलामे आपसी एकता पर जोर देबाक आवश्यकता अछि. हरेक क्षेत्रमे कार्यरत मैथिल सब कें ‘हाइलाइट' करबाक आवश्यकता अछि. अन्तमे संस्था सबसं अनुरोध करैत कहलाह जे हम सब अद्भुत कार्य करी जाय सं मिथिलाक नाम होअय. समाज आ जीवनक दर्पणक रूप मे जानल जायबला विधा नाटक कें प्रोत्साहन भेटबाक चाही.


मंचक अध्यक्ष जीबेन्द्र मिश्र नाटकक पैटर्न परिवर्तन केर समर्थन करैत बजलाह जे वर्तमान समय मे नाटक पुरना-धुरना तकनीकक सहयोग सं भ' रहल अछि. आब आन रंगमंच जेना मैथिली रंगमंच कें आधुनिकीकरण होबाक चाही. संगहि आश्वासन देलनि जे भविष्यमे अत्याधुनिक तकनीक केर उपलब्धतामे यथासंभव सहयोग प्रदान करताह. मंच संचालन नाट्य निर्देशक गंगा झा कएलनि.

उद्घाटन समारोहक बाद टाटानगर सं आयल मैथिलीक चर्चित गायिका अंजू कात्यायन द्वारा किछु मैथिलीक गीत प्रस्तुत कयल गेल. अंजू जीक गीत पर दर्शक झुमैत रहल. हाथक थपड़ी अंजू जीक उत्साह बर्धन करैत रहल. महानगरमे एकटा आर मैथिली कार्यक्रमक आयोजनक बादो नाटकक आनन्द उठाबय लेल उपस्थित दर्शकक अप्रत्यासित उपस्थिती देखबा योग्य छल. अतेक पैघ प्रेक्षागृह केर निचला सीट के' कहय, उपरका तल्ला पर सेहो दर्शकक उमड़ैत भीड़ अपन स्थान धेने छल जे ई साबित कय रहल अछि कि नाटकक लोकप्रियता मे कमी नहि, वृद्धि भ' रहल अछि.
एहि अवसर पर उपस्थित गणमान्यमे रामलोचन ठाकुर, युगलकिशोर झा, दयानाथ झा, किशोरीकान्त चौधरी, भवनाथ झा, योगेन्द्र पाठक 'वियोगी' प्रमुख छलाह.

(Report/Photo: भास्कर झा)
Sabhar:- Mithi Media

Maithili Drama:- PAATAK MANUKH at Mahajati Sadan, Kolkata at 3Feb 2013


कोकिल मंच केर 31म प्रस्तुतिकलकत्ता. 

कलकत्ता आ उपनगर केर रंगप्रेमी प्रवासी मैथिल लेल शुभ समाद अछि जे कोकिल मंच अपन नाट्य प्रदर्शन केर 31म पुष्प ल' तैयार अछि. मंच केर 23म वार्षिकोत्सव केर अवसर पर गीत-संगीत संग समस्यामूलक नाटक 'पातक मनुक्ख' केर मंचन 3 फ़रवरी 2013 कें सांझ 4:30 बजे महानगर स्थित महाजाति सदनमे होयत. पं. गोबिन्द झा द्वारा लिखल कथा पर आधारित एहि नाटक केर लेखक छथि अरविन्द अक्कू. नाटक निर्देशक गंगा झा मिथिमीडिया कें जनओलनि जे इहो नाटक रंगप्रेमी कें भरपूर मनोरंजन करत. नाटक संगहि गीत-संगीत केर कार्यक्रम सेहो अछि जाहि मे अंजू कात्यायन (टाटा) ओ प्रभुदास (दिल्ली) प्रस्तुति देताह. मंच दर्शकक पूर्ण समर्थन केर अपेक्षा रखैत अछि. नाटकक कार्ड वितरण भ' रहल अछि. इच्छुक व्यक्ति 9836168555 पर संपर्क क' सकैत छथि. ज्ञात हो जे कोकिल मंचक स्थापना 1989मे मूलत: सांस्कृतिक गतिविधिक ध्यानमे केन्द्रित करबाक उद्देश्य सं कयल गेल छल. मंच कुल 30 गोट मैथिलीक मौलिक आ अनुदित नाटकक मंचन गंगा झाक सफ़ल निर्देशनमे कलकत्ता सं मिथिला धरि निरंतर सफ़लतापूर्वक करैत रहल अछि. जओं देखबाक हो पातक मनुक्ख त' फेर प्रेक्षागृह अपनेक बाट ताकत 3 फरवरी कें.

Sambad: MithiMedia


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